Originally posted by: RPRRR42
त्यांना कसतरी करून त्या दोघांच लग्न लावायच आहे.अभी आगे डायलॉग्ज कुछ इस तरह रहेंगे.
अब हमारी बेटी से कौन शादी करेगा ,शकू
हम किसीके मूँह दिखाने के काबिल नहीं रहे.और ये सब तुम्हारे बेटे की वजह से हुआ है
बतिओ, कौन करेगा मेरे बेटे से शादी
मैं करुंगा ,इति ओम
हमें किसी का एहसान नहीं चाहिये.हमारी बेटी बोझ नहीं है. इति साळवी फँमिली
ये एहसान नहीं है,अगर किसी की हिफाजत करना,किसी के बारे में सोचना,किसी के खुशी के लिये खुश होना,किसी के गम मे दुखी होना प्यार है, तो है(एकदम परदेस क्लायमँक्स सीन शाहारुख❤️)
ये प्यार ही है.
झाल ,झाल शुभमंगल🤣
मला हे असे रोमँटिक डायलॉग्ज मराठीत लिहिता येत नाहीत, हिंदीचा पगडा आहे.😆