Originally posted by: Sutapasima
Do you think it’s Nature’s way of getting rid of those who are harmful for progression of species(miscreants) and let those remain who follow rules set by the social system to populate the earth once again ?? Just got curious of the ways of the nature ensuring survival of the fittest ?? Any correlation ??
I think, Nature also corrects itself, by itself,...... For example, example, when after many million yrs ( of planet's formation ) later, the the life started on planet earth and hence there was lots and lots layers of oxygen,.... 'Coz planet was new, O2 layers were deep and dense,... hence the giant Dinosaurs came,.. who breathed loads of oxygen also consumed lots of plants and vegetation,.. and smwhere the Nature realized its own mistake,... that this will not work 4ever,.... they will consume all O2 and Plantation from the face,... and hence, were wiped out as a whole,.... !
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Now it seems, it's radar-eye is on us human-beings,....... How to Pluck it outta planet ! Oh No !!
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^ To sum up, this Lime-Light kid now says,....
Fame due to :: => ( who'd predicted precisely about this period of Nov 2019 to April 2020 )
covid19's effect will be lot reduced after May ending,.. will be totally gone away by June ending,...
However he also warns that during this Dec 2020 to March 2021, some other form of act of God and / or similar Bio-attack, the earth will face and undergo which will be so many times stronger in magnitude, than this present one.
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कोरोना के संदर्भ में मन में आते प्रश्नों का वैज्ञानिक ज़वाब :
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1..#नोट , #फ़ल , #सब्ज़ी कैसे ,Sanitize करें :
सबसे पहले तो यह समझ लें कि बहुत panic और Paranoid ( बेहद शक्की ) न हों वायरस को लेकर ।
अब तक के शोधों में संक्रमण मुख्यतः droplet के रूप में ही पाया गया है। मुख्य बचाव भीड़ में न जाना, दूर से बात, मास्क, हाथ धोना
मुंह , नाक के पास हाथ न ले जाना ही हैं ।
Heinsberg जिले को जर्मनी का वुहान कहा गया क्योंकि वहीं से जर्मनी में इस एपिडेमिक ने रफ़्तार पकड़ी । वहां के वैज्ञानिकों ने ऐसे घर जिनमे कोविड संक्रमित व्यक्ति रहते थे
को शोध के लिए चुना । एवं उन्होंने विभिन्न Surface , किचेन, लकड़ी , स्टील, फ्रिज , पेपर, नोट इत्यादि से वायरस के सैंपल लिए। उन्होंने पाया कि 3 से 24 घंटे बाद भी वायरस का RNA उन्हें मिला लेकिन वह Virus , Multiply करने की क्षमता को चुके थे । अर्थात शायद वे जीवित नहीं थे ।
किंतु इस विषय पर और शोधों की आवश्यकता है।
अतः फल , सब्ज़ी , सरफेस इत्यादि के लिए सामान्य तरीके जैसे सब्ज़ी , फल लेने के बाद उन्हें सामान्य पानी की धार में धो कर 4 से 6 घंटे रख दें, अपने हाथ फिर से साबुन से धो लें ।
सब्ज़ी पकी है तो बात ही ख़त्म , फलों को 6 घंटे बाद फ़िर से धो कर खाएं ।
नोट , अख़बार छूने के बाद हाथ धो लें । पैसे एक पर्स में रखें और पर्स को एक अलग कमरे में 10 से 12 घंटों के लिए छोड़ दें तब ही फ़िर उपयोग करें ।
सामान खरीदते समय फोन पे का इस्तेमाल अधिक करें या छुट्टे पैसों का भी समान खरीद लें ।
ब्रेड, बिस्किट जैसी चीजें एक कंटेनर में पैकेट फाड़ कर गिरा लें और पैकेट को Dustbin में डाल हाथ धो लें ।
दूध क्योंकि उबल जाता है तो कोई रिस्क नहीं है ।
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2.#भारतमेंबढ़तेकेसकितनीचिंताकरें :
क्या भारत स्टेज 3 में है ?
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हमारी केस बढ़ने की गति अब भी बहुत अधिक नहीं है । न ही हम स्टेज 3 में हैं क्योंकि सरकार कांटेक्ट ट्रेस कर पा रही है कुछ अपवादों के अतिरिक्त । हमारे कुछ शहर अवश्य मुहाने पर खड़े हैं अतः जनता को बहुत साथ देने की आवश्यकता है ।
वैसे भी
पूरा चीन, पूरा अमरीका, पूरा इटली , पूरा ईरान Community transmission में नहीं गया था उनके कुछ खास शहरों में ऐसा हुआ है ।
हमारी टेस्ट करने की संख्या में भी कई गुना इज़ाफ़ा होने से केस अधिक दिखेंगे ।
हमारी अच्छी स्ट्रेटेजी के अतिरिक्त कोई तो कारक है जो भारत, पाकिस्तान , बांग्लादेश के हालात बहुत ख़राब नहीं हुए । पाकिस्तान में ग़रीबी , और कई अन्य कारणों से सही योजनाओं के न होते हुए भी हालात धीमी गति से ही बिगड़ रहे हैं। संभावित Host Factor एवं पर्यावरण factor पर
पहले ही लेख लिख चुका हूँ ।
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3.#क्याहमटेस्टकमकररहेहैं :
WHO एवं दुनिया के कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार हम बेहद कम टेस्ट कर रहे हैं , शायद इसलिए हमारी पॉजिटिव संख्या कम है ।
किंतु मैं स्थित पर नज़र रखते हुए यह कहूंगा कि,
हमारे देश के Epidemiologist, पब्लिक हेल्थ वैज्ञानिक, ICMR , भारत सरकार ने एक कुशल चैस ग्रांडमास्टर की तरह अब तक खेला है और अपने Resources को मितव्ययता, किंतु तार्किक द्रष्टिकोण से खर्च किया है ।
हम यदि वाकई टेस्ट कम कर रहे होते हमारे अस्पतालों में बिना Diagnosis के रह गए Pneumonia मरीजों की संख्या में काफ़ी इज़ाफ़ा देखने मिलता ।
संख्या में हमने टेस्ट भले ही कम किये हैं लेकिन टेस्ट किसका करना है यह चुनने का हमारा मानदंड बेहद अच्छा और सही है । एवं आवश्यकता अनुरूप हम इसमें इज़ाफ़ा एवं बदलाव कर रहे हैं।
टेस्ट की संख्या कम होने के बावजूद एक रोचक तथ्य यह है कि कुल test में से Positive आने की दर हमारी दुनिया में सर्वाधिक कम है । यह भी साबित करता है कि हम सही जा रहे हैं ।
हमारे देश में बेहद मजबूत Public health model बरसों पहले से ही है । जिसका हमें इस आपदा में बहुत लाभ मिल रहा है।
अंतः चिन्ता नहीं सावधानियां बरतें, गरीबों , सड़क के जानवरों की मदद करें ।
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4..#क्यावायरसख़त्महोगायाआगेभी_रहेगा :
जितने प्यारे हम हैं प्रकृति को उतना ही प्यारा वायरस भी है।
दोनों प्रकृति की अद्भत संरचना हैं। और दोनों कहीं नहीं जाने वाले ।
वायरस पूर्णतः खत्म या तो टीकाकरण ( स्माल पॉक्स, पोलियो ) से होते हैं अथवा हर्ड इम्युनिटी ( स्पैनिश फ्लू)
या कभी कभी विपरीत पर्यावरण ।
हो सकता है यह वायरस खसरे, चिकेनपॉक्स की तरह हमारे जीवन का हिस्सा बन जाये या हो सकता है इसके भाई
SARS और बहन MERS की तरह जुलाई तक बेहद कम हो जाये । या स्पेनिश फ्लू की तरह 2 साल तक हमें परेशान करे । यह सब अभी भविष्य है । लेकिन मेरी आभासी फीलिंग जुलाई तक इसके कम होने की है बशर्ते हम सब
मिलकर सरकारी निर्देशों का पालन करें ।
बाद के लिए तो दवा , टीका आ ही जायेगा ।
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5. #येPandemicहुआहीक्यों :
यह बेहद अप्रत्याशित नहीं था। बिल गेट्स का youtube पर Ted Talk है । जिसमें दो वर्ष पहले वे यही कह रहे हैं कि ,हम मतलब विश्व वायरस pandemic के लिए तैयार नहीं है ।
अमेरिका की एक इन्वेस्टमेंट कंपनी ने इसे White swan Event ( निवेशकों की भाषा ) मान पहले से तैयारी रख 3000 गुना प्रॉफिट कमाया है ।
प्रकृति चाहती मनुष्य दूर दूर तक उड़ कर अलग अलग ह्यूमन रेस से मिले तो हमें पंख दिए होते । हमें सीमित दूरी तक ले जाने वाले पैर देकर एक प्राकृतिक Lockdown प्रकृति ने करोड़ों बरसों से किया हुआ था । हमने पिछले 400 वर्षों में इन सभी सीमाओं को लांघा है।
इन सीमाओं के लांघने में हमने युद्धों में करोड़ों जानें लीं ।
दूसरी रेस को गुलाम बनाने जैसे अनेक कृत्य किये । इसकी व्यवस्था प्रकृति ने नहीं की थी । दूसरे जीव Survival के लिए लड़ते हैं लेकिन सामूहिक गुलाम नहीं बनाते ।
वायरस हमेशा से मनुष्यों को मारते रहे हैं लेकिन समझना होगा वे हमें मारते नहीं स्वयं जीना चाहते हैं और जीने के लिए ये अधूरे जीव कोशिका ढूंढते हैं । उनके जीने की प्रक्रिया का साइड इफ़ेक्ट है हमारी मौत ।
लेकिन ये वायरस एक सीमित ज़गह तक ही फैल कर रुक जाते थे, प्राकृतिक लॉक डाउन की वजह से ।
स्पेनिश फ्लू पहले विश्व युद्ध की युद्ध पोतों द्वारा सैनिकों की आवाजाही से फैला था ।
अतः यह हुआ ही क्यों से अधिक महत्वपूर्ण जानना यह है कि ऐसा आगे भी होगा और होता रहेगा जब तक हम मनुष्य स्वयं के विकास पर न ध्यान देने लगें ,प्राकृतिक नियमों की मदद से किये गए कुछ अविष्कारों की जगह ।
या फ़िर विज्ञान की यह सुरंग , Puzzle, Game ही हमें अगले हमले तक लाइफलाइन देती रहेगी । लाइफ लाइन जैसे कि वैक्सीन ।
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Hydroxycloroquin पर वैज्ञानिक जानकारी:-
आरंभिक कमेंट्स से मुझे लगा लेख जटिल औऱ लंबा लग रहा है ।
अतः सबसे जटिल पार्ट जिससे शुरुआत हुई थी को लेख से हटा दिया है ।
जो लोग विज्ञान को समझने में रुचि रखते हों उनके लिए वह भाग यहां पोस्ट कर दे रहा हूँ ।
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Hydroxy_Chloroquine
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अमरीकी प्रेजिडेंट ट्रम्प के भाषणों और बयानों ने Hydroxychloroquin का नाम दुनिया भर के आम जनों को एस्पिरीन सा रटवा दिया है । साथ ही बहुत सी उत्सुकता को भी जन्म दिया है उनकी इस दवा के प्रति अधीरता ने ।
जहां न देने की संभावना पर वे बिफ़र जाते हैं वहीं मिल जाने पर बच्चों सा उछल जाते हैं ।
फ़िलहाल यह दवा कोविड पॉजिटिव मरीज़ जो कि गंभीर या अतिगंभीर में दी जा रही है। अस्सी प्रतिशत मरीज़ जो हल्के फुल्के लक्षणों वाले होते हैं में इसे नहीं दिया जाता ।
साथ ही ऐसे हेल्थ वर्कर जो सीधे कोरोना संक्रमण के उपचार, जांच इत्यादि में लगे हैं को Prophylaxis(बचाव ) के रूप में दिया जाता है ।
किंतु यह दवा कारगर है भी या नहीं अभी आश्वस्त हो कर नहीं कहा जा सकता । SARS पर कुछ पुराने शोध एवं वुहान , इटली के कुछ शोध जो कि छोटे और बहुत कम समय काल के लिए हैं इसे कोविड की दवा नहीं बना देते ।
इलाज़ से इतर क्या यह दवा बचाव कर सकती है कोविड संक्रमण के विरुद्ध ?
मतलब यदि व्यक्ति यह खा रहा हो तो या तो उसे कोविड संक्रमण हो ही न या हो भी तो वह गंभीर न पड़े । इस बात की शोधपरक पड़ताल कैसे की जा सकती है ?
वह भी शीघ्र ।
ऐसा तो किया नहीं जा सकता न कि HCQ किसी को खिलाई जाये एवं फिर उसे संक्रमण में रख कर अध्ययन किया जाए कि यह बचाव करती है या नहीं । यह तरीका अनैतिक एवं ग़ैरजनूनी होगा ।
फ़िर क्या किया जा सकता है ? जानने के लिए ।
HCQ दवा दरअसल दो Automotive बीमारियों Systemic Lupus Erythematous एवं Rheumatoid Arthritis में लंबे समय ... महीनों से सालों के लिए इन मरीजों को दी जाती है । भारत में इन दोनों बीमारियों के लाखों, करोड़ों मरीज़ हैं । अमेरिका में हर साल इसके 50 लाख Prescription होते हैं ।
ऐसे में पूरी दुनिया से यदि हम जितने भी लोगों का कोविड पॉजिटिव हैं उन सभी के HCQ दवा पर वो हैं या नहीं को नोट करते जाएं तो जल्दी ही हमें सटीक अंदाज़ा लग सकता है ।
समझिए....
SLE के टोटल मरीज़ प्रति लाख जनसंख्या में कितने हैं एवं कितनों को कोविड पॉज़िटिव मिला प्रति लाख Non SLE पॉजिटिव केसेस के अनुपात में , इसका तुलनात्मक अध्ययन हो । खासकर ऐसे देशों में जहां कम्युनिटी ट्रांसमिशन हो चुका हो , तब Statistical analysis से हम निष्कर्ष निकाल सकेंगे ।
वैसे मुझे उम्मीद है ऐसा किया ही जा रहा होगा एवं ज़ल्दी शोध प्रकाशित भी होंगे ।
आम लोग GOVt Of India की गाइडलाइन्स को ही मानें । मन से कोई दवा न खाएं ।
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Now,......He even wants to open all of the 50 States, under this Dancing-death Riot-zone situation,.. !
https://www.facebook.com/CBS4RGV/videos/250954659393326/
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Edited by Himalaya10 - 5 years ago