Coronavirus (COVID-19) Updates || Note: pg 55,132|| - Page 24

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Posted: 6 years ago

उदय पंढरीनाथ ओतारी जी के पोस्ट:

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कोरोना आया और हैंड सॅनिटायजर का नंगा नाच चालू हो गया।

अभी तो ‘हैंड सॅनिटायजर’ की डिमांड इतनी भयावह है खासकर मेट्रो शहरो में कि आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते। 90रुपये की जगह 400रुपये, 500रुपये से लोगों ने खरीदे हैं,

अभी 5दिन से तो किसी भी मेडिकल स्टोर में मेरे यहाँ सॅनिटायजर उपलब्ध नहीं हैं – न मेडिकल स्टोर, न सप्लायर, न स्टॉकिस्ट।

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क्या सच मे यह सत्य है??

सोचो भोले लोगो के इमोशनल के साथ क्या खेल खेला जा रहा है अभी।

अब हम चले हमारे पारंपरिक सॅनिटायजर की ओर वो और कोई नहीं फिटकरी हैं (हायड्रेटेड पोटॅशियम अ‍ॅल्युमिनियम सल्फेट// K2SO4 Al2(SO4)3.24H2O)।

जब आप फिटकरी के पानी से अपने हाथो को धोते हो या स्नान में उपयोग करते हो तब कोई भी विषाणु आपके शरीर पर जिंदा नहीं रह सकता।

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गरम पानी में फिटकरी डालकर कुल्ले करने से गले और मुँह के विषाणु नष्ट होते हैं।

इसलिये हमेशा फिटकरी का टूकड़ा अपने पॉकेट मे रखें और स्वस्थ रहें।

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जय जय श्रीराम जी

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Posted: 6 years ago

मांसाहार पर वैज्ञानिकों की शोध

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प्राकृतिक आपदाओं पर हुई नई खोजों के नतीजें मानें तो इन दिनों बढ़ती मांसाहार की प्रवृत्ति भूकंप और बाढ़ के लिए जिम्मेदार है। आइंस्टीन पेन वेव्ज के मुताबिक मनुष्य की स्वाद की चाहत- खासतौर पर मांसाहार की आदत के कारण प्रतिदिन मारे जाने वाले पशुओं की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है।

#कोरोना_वायरस

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सूजडल (रूस) में पिछले दिनों हुए भूस्खलन और प्राकृतिक आपदा पर हुए एक सम्मेलन में भारत से गए भौतिकी के तीन वैज्ञानिकों ने एक शोधपत्र पढ़ा। डा. मदन मोहन बजाज, डा. इब्राहीम और डा. विजयराजसिंह के अलावा दुनियाँ भर के 23 से अधिक वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए शोधपत्र के आधार पर कहा गया कि भारत, जापान, नेपाल, अमेरिका, जार्डन, अफगानिस्तान, अफ्रीका में पिछले दिनों आए तीस बड़े भूकंपों में आइंस्टीन पैन वेव्ज (इपीडबल्यू) या नोरीप्शन वेव्ज बड़ा कारण रही है।

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इन तरंगों की व्याख्या यह की गई है कि कत्लखानों में जब पशु काटे जाते हैं तो उनकी अव्यक्त कराह, फरफराहट, तड़प वातावरण में तब तक रहती है जब तक उस जीव का माँस, खून, चमड़ी पूरी तरह नष्ट नही होती. उस जीव की कराह खाने वालों से लेकर पूरे वातवरण मे भय रोग और क्रोध उत्पन्न करती है। यों कहें कि प्रकृति अपनी संतानों की पीड़ा से विचलित होती है। अध्ययन मे बताया गया है कि प्रकृति जब ज्यादा क्षुब्ध होती है तो मनुष्य आपस में भी लड़ने भिड़ने लगते हैं चिड्चिडे हो जाते हैं और विभिन्न देश प्रदेशों में दंगे होने लगते हैं। सिर्फ स्वाद के लिए बेकसूर जीव जंतुओं की हत्या ही इस तरह के दंगों का कारण बनती है और कभी कभी आत्महत्या का भी ।

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ज्यादातर मामलों में प्राकृतिक उत्पात जैसे अज्ञात बीमारियाँ, हार्टअटेक, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, बाढ़, भूकंप, ज्वालामुखी के विस्फोट जैसे संकट आते हैं। इस अध्ययन के मुताबिक एक कत्लखाने से जिसमें औसतन पचास जानवरों को मारा जाता है 1040 मेगावाट ऊर्जा फेंकने वाली इपीडब्लू पैदा होती है।

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दुनिया के करीब 50 लाख छोटे बड़े कत्लखानों में प्रतिदिन 50 लाख करोड़ मेगावाट की मारक क्षमता वाली शोक तरंगे या इपीडव्लू पैदा होती है। विश्व के 700 से अधिक वैज्ञानिकों सहित अनेक डाक्टरों के सम्मेलन में माना गया कि कुदरत कोई डंडा ले कर तो इन तंरगों के गुनाहगार लोगों को दंड देने नहीं निकलती। उसकी एक ठंडी सांस भी धरती पर रहने वालों को कंपकंपा देने के लिए काफी है।

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कत्लखानों में जब जानवरों को कत्ल किया जाता है तो बहुत बेरहमी के साथ किया जाता है बहुत हिंसा होती है बहुत अत्याचार होता है। जानवरों का कतल होते समय उनकी जो चीत्कार निकलती है, उनके शरीर से जो स्ट्रेस हारमोन निकलते है और उनकी जो शोक वेभ निकलती है वो पूरी दुनिया को तरंगित कर देती है कम्पायमान कर देती है। परीक्षण के दौरान लैबरोट्री में भी जानवरों पर ऐसा हीं वीभत्स अत्याचार होता है।...

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जानवरों को जब कटा जाता है तोह बहुत दिनों तक उनको भूखा रखा जाता है और कमजोर किया जाता है फिर इनके ऊपर ७० डिग्री सेंट्रीगेड गर्म पानी की बौछार डाली जाती है उससे शरीर फूलना शुरु हो जाता है तब गाय भैंस बकरी तड़पना और चिल्लाने लगते हैं तब जीवित स्थिति में उनकी खाल को उतारा जाता है और खून को भी इकठ्ठा किया जाता है | फिर धीरे धीरे गर्दन काटी जाती है, एक एक अंग अलग से निकला जाता है।

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आज का आधुनिक विज्ञानं ने ये सिद्ध किया है के मरते समय जानवर हो या इन्सान अगर उसको क्रूरता से या उम्र पूरी होने के पहले मारा जाता है तो उसके शरीर से निकलने वाली जो चीख पुकार है उसकी बाइब्रेशन में जो नेगेटिव वेव्स निकलते हैं वो पूरे वातावरण को बुरी तरह से प्रभावित करता है और उससे सभी मनुष्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, खासतौर पर सबसे ज्यादा असर ऐसे जीव का उन मनुष्यों पर पड़ता है जो उसका माँस खाते है और ये दुष्प्रभाव एक बार खाने के बाद कम से कम 18 महीने तक रहता है बड़ी बात ये है कि खाने वाले के परिजन और अधिक तनावग्रस्त, दुखी व भयंकर रोगॊ से पीडित होते जाते है । इससे मनुष्य में जिद करने गाली देने, चोरी करने, दूसरो का धन हड़पने, के साथ अत्यंत क्रोध व हिंसा करने की प्रवृत्ति बढ़ती है जो अत्याचार और पाप पूरी दुनिया में बढ़ा रही है |

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अफ्रीका के दो प्रोफेसर, दो जर्मनी, दो अमेरिका के, एक भारतीय मदनमोहन और चार जर्मनी के वैज्ञानिकों ने अपने अपने हेड मार्क फीस्ट्न, डेविड थामस, जुँनस अब्राहम व क्रिओइबोँद फिलिप् के साथ बीस साल इस विषय पर रिसर्च किया है और उनकी रिसर्च ये कहती है कि जानवरों का जितना ज्यादा कत्ल किया जायेगा जितना ज्यादा हिंसा से मारा जायेगा उतना ही अधिक दुनिया में भूकंप आएंगे, जलजले आएंगे, प्राकृतिक आपदा आयेगी उतना ही दुनिया में संतुलन बिगड़ेगा और लोग दुखी, तनाव्युक्त व हार्टअटेक से पीडित होंगे.

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लाश खाना छोड़ो और शाकाहारी बनो

दिल पिघल गया हो तो शेयर करे 🙏

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Posted: 6 years ago

Is Corona Curse or Blessing ????

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कोरोना नहीं करुणा अवतार कहिये...!

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दुनिया भर में हवा साफ हो रही है, सड़कों पर शोर कम है। लोग यहाँ वहाँ यात्रा करना छोड़ परिवार के साथ समय बिता रहे हैं। लक्जरी क्रूज जहाज समुद्र को गंदा नहीं कर रहे हैं। लोग मांस खाना छोड़ रहे हैं और अपने हाथ धोने के लिए समय निकाल रहे हैं। हाथ मिलाने की विदेशी कुसंस्कार को छोड़ लोग भारतीय संस्कृति के तर्ज पर हाथ जोड़ नमस्कार करना शुरू कर दिये।

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जीवित रहने के लिए भगवान का आभारी महसूस कर रहे हैं, जीव हत्या काफी रुक गई है। जीव जन्तु सब प्रसन्न है, यह करुणा अवतार नही तो और क्या है...🙏🏻

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हिंदू रीतिरिवाजों के अनुसार भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर हो रहा है।

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Posted: 6 years ago

COVID-19 की स्टेटिस्टिक्स और वुहान में इस रोग के फैलाव और नियंत्रण का अध्ययन करने पर पता चलता है इस बीमारी के प्रसार के सबसे बड़े कारक का और यह कारक है "देश के अंदर लोगों का एक से दूसरी जगह जाने की आवृति (frequency of internal migration)" यह इंटरनल माइग्रेशन ही वह सबसे बड़ा फैक्टर है जो निर्धारित करता है की यह बीमारी और फैलेगी या नियंत्रण में रहेगी।

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विदेशों तथा भारत में चले महाअभियान में हाथों की इस वायरस से सुरक्षा, सैनिटाइज़र और मास्क के उपयोग पर जितना जोर दिया गया है उतना जोर इस बात पर भी होना चाहिए कि लोग खुद से गैर जरूरी जगहों पर जाने से बचें, अभी भी लोग घूमने फिरने, रिश्तेदारों के यहाँ जाने, शादियों जैसी चीज़ों के लिए ऐसी यात्रायें कर रहे हैं जो कि टाली जा सकती हैं।

सरकार सार्वजनिक स्थलों, स्कूल, कॉलेज बंद करके यही करना चाह रही है पर लोगों को खुद से यह महसूस करना होगा की उनकी एक गैर जरूरी यात्रा इस बीमारी के फैलाव में योगदान दे सकती है।

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अभी हम इस संक्रमण के द्वितीय चरण में हैं जहाँ विदेश से आए लोग स्वयं और उनके परिवार के सदस्य खतरे में हैं, आगे इसके तृतीय चरण में बाहर से आने वाले लोगों एवं उनके परिजनों से यह बीमारी दूसरे सामान्य जनों तक फ़ैल सकती है, वायरस के इन्क्यूबेशन टाइम के हिसाब से अगर और लोग संक्रमित हुए होंगे तो इसका पता अगले दो हफ़्तों में लगेगा मतलब लग-भग इस महीने के अंत तक और इसके बाद चौथे चरण में यह संक्रमित हुए अन्य लोगों को संक्रमित करती है इस चरण से ही अनियंत्रित तबाही की शुरुआत होती है।

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बेहतर होगा हम तीसरे चरण में प्रवेश ना ही करें और इस बात का पता हमें आने वाले दो हफ्तों में लग जाएगा, अभी सबसे संवेदनशील समय है, अगर रोग का प्रसार कम हुआ तो इसका मतलब है की हम सुरक्षित हैं पर यदि ऐसे मामलों में वृद्धि हुई जिनमें विदेश से आए संक्रमित व्यक्तियों और उनके परिजनों ने अन्य लोगों को संक्रमित करना शुरू किया तो स्तिथि चिंताजनक होगी।

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अभी की स्तिथि महत्वपूर्ण इस लिए भी है क्यूंकि इस स्तिथि में यदि सही कदम उठाए गए तो इस बीमारी का प्रसार रोका जा सकता है पर इसके लिए सबसे आवश्यक बात है कि लोगों के इंटरनल माइग्रेशन पर रोक लगे और इसके लिए जरूरी है की हम खुद तो ऐसा ना ही करें साथ ही अपने जान पहचान वालों को भी सभी तथ्यों एवं खतरों को बताते हुए अनावश्यक यात्राएं न करने के लिए प्रोत्साहित करें और बताये गए बेसिक सेनिटेशन और हाइजीन का ध्यान रखें ,अफवाहों से बचें। बीमारी के पैटर्न के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाएं एवं दूसरों के साथ भी शेयर करें।

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Posted: 6 years ago

Heart melting Write-ups ::

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I am writing to you from Bergamo, Italy, at the heart of the coronavirus crisis. The news media in the US has not captured the severity of what is happening here. I am writing this post because each of you, today, not the government, not the school district, not the mayor, each individual citizen has the chance, today to take actions that will deter the Italian situation from becoming your own country’s reality. The only way to stop this virus is to limit contagion. And the only way to limit contagion is for millions of people to change their behavior today.

If you are in Europe or the US you are weeks away from where we are today in Italy.

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I can hear you now. “It’s just a flu. It only affects old people with preconditions”

There are 2 reasons why Coronavirus has brought Italy to it’s knees. First it is a flu is devastating when people get really sick they need weeks of ICU – and, second, because of how fast and effectively it spreads. There is 2 week incubation period and many who have it never show symptoms.

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When Prime Minister Conte announced last night that the entire country, 60 million people, would go on lock down, the line that struck me most was “there is no more time.” Because to be clear, this national lock down, is a hail mary. What he means is that if the numbers of contagion do not start to go down, the system, Italy, will collapse.

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Why? Today the ICUs in Lombardy are at capacity – more than capacity. They have begun to put ICU units in the hallways. If the numbers do not go down, the growth rate of contagion tells us that there will be thousands of people who in a matter of a week? two weeks? who will need care. What will happen when there are 100, or a 1000 people who need the hospital and only a few ICU places left?

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On Monday a doctor wrote in the paper that they have begun to have to decide who lives and who dies when the patients show up in the emergency room, like what is done in war. This will only get worse.

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There are a finite number of drs, nurses, medical staff and they are getting the virus. They have also been working non-stop, non-stop for days and days. What happens when the drs, nurses and medical staff are simply not able to care for the patients, when they are not there?

And finally for those who say that this is just something that happens to old people, starting yesterday the hospitals are reporting that younger and younger patients – 40, 45, 18, are coming in for treatment.

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You have a chance to make a difference and stop the spread in your country. Push for the entire office to work at home today, cancel birthday parties, and other gatherings, stay home as much as you can. If you have a fever, any fever, stay home. Push for school closures, now. Anything you can do to stop the spread, because it is spreading in your communities – there is a two week incubation period – and if you do these things now you can buy your medical system time.

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And for those who say it is not possible to close the schools, and do all these other things, locking down Italy was beyond anyone’s imagination a week ago.

Soon you will not have a choice, so do what you can now.

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Please share.


Source : https://www.facebook.com/cristina.higgins.7/posts/10157623212885189?hc_location=ufi

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Posted: 6 years ago

ICMR revises startaegy for COVID-19 tests


https://icmr.nic.in/sites/default/files/upload_documents/2020-03-20_covid19_test_v3.pdf


Current testing strategy:

i. All asymptomatic individuals who have undertaken international travel in the last 14 days:

- They should stay in home quarantine for 14 days.

- They should be tested only if they become symptomatic (fever, cough, difficulty in breathing)

- All family members living with a confirmed case should be home quarantined

ii. All symptomatic contacts of laboratory confirmed cases.

iii. All symptomatic health care workers.

iv. All hospitalized patients with Severe Acute Respiratory Illness (fever AND cough and/orshortness of breath).

v. Asymptomatic direct and high-risk contacts of a confirmed case should be tested oncebetween day 5 and day 14 of coming in his/her contact.

- Direct and high-risk contact include those who live in the same household with a confirmed case and healthcare workers who examined a confirmed case without adequate protection as per WHO recommendations.

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Posted: 6 years ago
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Posted: 6 years ago

Here is a complete list of 75 COVID-19 testing labs in India


https://icmr.nic.in/sites/default/files/upload_documents/Functional_Testing_Labs.pdf

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Posted by: vijay · 1 years ago

Hi All, First off, a huge thank you to each one of you! Your active participation and enthusiasm continue to shape our community into a vibrant...

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